Monday, September 16, 2013

Saransh

एक औरत
 कुछ टूटी सी
कुछ रूठी सी
हर रात मेरे सपनों में आती है
कभी तो उसकी आँखो में
ख़ुशी और कभी ग़म दिखता है
अो मेरी करुणा की देवी
अपने हृदय को मत पिघलने दे
इसमें तेरे जीवन का सारांश है
मैं तेरे साथ जियूँगा
तेरे इस दर्द को पियुंगा

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