एक औरत
कुछ टूटी सी
कुछ रूठी सी
हर रात मेरे सपनों में आती है
कभी तो उसकी आँखो में
ख़ुशी और कभी ग़म दिखता है
अो मेरी करुणा की देवी
अपने हृदय को मत पिघलने दे
इसमें तेरे जीवन का सारांश है
मैं तेरे साथ जियूँगा
तेरे इस दर्द को पियुंगा
कुछ टूटी सी
कुछ रूठी सी
हर रात मेरे सपनों में आती है
कभी तो उसकी आँखो में
ख़ुशी और कभी ग़म दिखता है
अो मेरी करुणा की देवी
अपने हृदय को मत पिघलने दे
इसमें तेरे जीवन का सारांश है
मैं तेरे साथ जियूँगा
तेरे इस दर्द को पियुंगा
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